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भारत ने ISA को पर्यवेक्षक का दर्जा देने के लिए UN में पेश किया प्रस्ताव, ग्रीन एनर्जी डिप्लोमेसी में होगी नई शुरुआत

टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि इसके जरिये ग्रीन एनर्जी डिप्लोमेसी के नए दौर की शुरुआत होने की अपेक्षा है

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Photo from Unplash
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संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) को पर्यवेक्षक का दर्जा देने के लिए मसौदा प्रस्ताव पेश किया है। एक लीडिंग डेली की रिपोर्ट के अनुसार UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा है कि भारत और फ्रांस की ओर से ISA को पर्यवेक्षक का दर्जा देने के लिए मसौदा प्रस्ताव पेश कर सम्मानित महसूस कर रहा हूं।

 

टीएस तिरुमूर्ति ने मसौदा प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि ISA अपने प्रयासों से सोलर एनर्जी के प्रसार के जरिये न्यायसंगत ऊर्जा समाधान पेश करेगा और इसके जरिये ग्रीन एनर्जी डिप्लोमेसी के नए दौर की शुरुआत होने की अपेक्षा है। उन्होंने आगे कहा कि सोलर एनर्जी स्थापित करने के जरिए उचित और समान ऊर्जा समाधान करने के अपने प्रयासों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन से हरित ऊर्जा कूटनीति का नया युग शुरू होने की उम्मीद है।

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संयुक्त राष्ट्र महासभा में टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि ISA प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण, सोलर एनर्जी के भंडारण और सदस्य देशों को वित्तीय सहायता देने जैसे कुछ सवालों को हल करने की ओर बड़ा कदम उठा रहा है। ISA का उद्देश्य साल 2030 तक सोलर एनर्जी सेक्टर को विकसित करने के लिए 1000 अरब डालर के निवेश की धारा बनाना है।

 

टीएस तिरुमूर्ति ने आगे कहा कि साथ ही ISA का उद्देश्य सोलर एनर्जी तकनीक के विकास व जोखिम निस्तारण को अधिक बेहतर बनाना भुई है। इसमें सदस्य देशों में सौर ऊर्जा इस्तेमाल बढ़ाने के लिए आसान वित्तपोषण की व्यवस्था बनाने पर भी जोर है। बता दें कि भारत व फ्रांस ने संयुक्त रूप से साल 2015 में पेरिस में आयोजित 21वें कांफ्रेंस आफ पार्टीज आफ द यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन आन क्लाइमेट चेंज (COP 21) के दौरान ISA को लांच किया था। आस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन, डेनमार्क सहित लगभग दो दर्जन से ज्यादा देश इसके सह प्रायोजक हैं।

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