Connect with us

दुनिया

आर्कटिक की बर्फ की सटीक निगरानी के लिए वैज्ञानिकों ने विकसित किया खास टूल, जानिए कैसे करता है काम

आर्कटिक की निगरानी के लिए विकसित किए गए टूल का नाम आइसनेट है

Published

on

Photo from Unplash
Photo from Unplash

ग्लोबल वार्मिग को लेकर दुनिया भर के वैज्ञानिक शोध करते रहते हैं। ग्लोबल वार्मिंग के चलते विश्व पर जलवायु परिवर्तन का खतरा मंडरा रहा है। आर्कटिक को भी ग्लोबल वार्मिंग ने प्रभावित किया है। एक लीडिंग डेली की रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिकों ने आर्कटिक की बर्फ की सटीकता के साथ निगरानी करने के लिए एक खास टूल विकसित किया है।

 

रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे (BAS) और द एलन ट्यूरिंग इंस्टीट्यूट के नेतृत्व में वैज्ञानिकों के एक दल ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित एक खास टूल तैयार करने में सफलता हासिल की है। जिसकी मदद से बर्फ की निगरानी और सटीकता के साथ की जा सकेगी। इस टूल का नाम आइसनेट है। आइसनेट की मदद से एक सीजन पहले ही आर्कटिक की बर्फ के पिघलने का सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा।

Photo from Unplash

Photo from Unplash

वैज्ञानिकों ने आइसनेट को 95 फीसदी सटीक पाया है। आइसनेट को डीप लर्निग कांसेप्ट के आधार पर विकसित किया गया है। इस प्रणाली में सेटेलाइट सेंसर से मिले डाटा का विश्लेषण पारंपरिक जलवायु माडल के डाटा के साथ किया जाता है। इसकी सहायता से समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे, जिससे यहां रहने वाले जीवों को बर्फ के पिघलने से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा।

 

वैज्ञानिकों के मुताबिक तापमान के बढ़ने के कारण पिछले चार दशकों में आर्कटिक का समुद्री बर्फ क्षेत्र आधा रह गया है। इस बदलाव का प्रभाव दुनिया भर भी देखने को मिलेगा। डाटा विज्ञानी और इस रिसर्च के प्रमुख लेखक टाम एंडरसन के अनुसार आर्कटिक दुनिया उन जगहों में शामिल है जहां जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक असर देखने को मिलता है। आइसनेट के बारे में विस्तृत डिटेल नेचर कम्यूनिकेशनंस नामक जर्नल में प्रकाशित की गई है।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *