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Chandrayaan 2: विफल होने के बाद भी कई मायनों में सफल साबित हुआ चंद्रयान-2, ज्वालामुखी और जलीय बर्फ के दिए सबूत

चंद्रयान-2 का आर्बिटर अब भी काम कर रहा है

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Picture shared by ISRO [Twitter]

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बताया है कि दो साल पहले चंद्रमा पर लैंडिंग करते समय संपर्क टूटने के कारण विफल घोषित किए गए चंद्रयान-2 मिशन ने विफलता के बावजूद भी वैज्ञानिकों को ऐसी जानकारी उपलब्ध कराई है जिसे नई खोज की श्रेणी में शामिल किया जा सकता है। ISRO ने बताया कि इस डाटा में चंद्रमा की सतह के अंदर जलीय बर्फ और बाहर ज्वालामुखी की उपस्थिति के सबूत भी शामिल हैं। दोनों खोज को बेहद अहम माना जा रहा है।

 

ISRO के अनुसार चंद्रयान-2 अंतरिक्षयान में लगे उपकरणों से हाल ही में स्थापित हुए संपर्क से जो डाटा हासिल हुआ है। उसने इस मिशन को 98 फीसदी तक सफल साबित किया है। इसके अलावा चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर अब भी काम कर रहा है और यह अगले पांच साल तक लगातार डाटा भेजता रहेगा जिससे चंद्रमा की सतह के बारे में जानने के कई अवसर भी मिलेंगे।

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ISRO के चेयरमैन के. सिवन ने चंद्रयान-2 से हासिल हुए आंकड़ों को और विज्ञान दस्तावेजों को वैज्ञानिकों के उपयोग के लिए जारी किया है। इसके अलावा उन्होंने चंद्रयान-2 के कक्ष पेलोड का डाटा भी जारी किया है। के. सिवन ने बताया कि यान में लगे उपकरणों से आए डाटा से कई दिलचस्प वैज्ञानिक निष्कर्ष निकले हैं। जिन्हें साइंस जर्नल में पब्लिश कराया जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय बैठकों में भी पेश किया जा रहा है।

 

ISRO ने बताया है कि चंद्रयान-2 में लगे मास स्पेक्ट्रोमीटर चेस-2 ने पहली बार एक ध्रुवीय कक्षीय मंच से चंद्रमा के बाहरी वातावरण की आवेशहीन संरचना का भी अध्ययन किया है। इससे चंद्रमा के मध्य और उच्च अक्षांशों पर एरगॉन-40 की परिवर्तनशीलता से जुड़ी अहम जानकारी मिली है। इसरो के अनुसार चंद्रयान-2 ने अपने IIRS उपकरण की मदद से पहली बार चंद्रमा की जलयोजन विशेषताओं का पता लगाया है। साथ ही इसके आर्बिटर में लगे लार्ज एरिया सॉफ्ट एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (क्लास) उपकरण ने चंद्रमा की सतह पर पानी (H2O) की बर्फ की मौजूदगी के भी स्पष्ट संकेत दिए हैं।

 

ISRO ने बताया कि चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर में आठ उपकरण लगे हैं। जो अलग-अलग तरह से लगातार चंद्रमा को लेकर अपने प्रयोग कर रहे हैं और डाटा भेज रहे हैं। बता दें कि चंद्रयान-2 मिशन को 22 जुलाई, 2019 को लॉन्च किया गया था। इसमें लगे प्रज्ञान रोवर और विक्रम लैंडर को चंद्रमा की सतह पर लैंड करना था। लेकिन 6 सितंबर को लैंडिंग के दौरान ISRO का संपर्क इनसे टूट गया था। हालांकि चंद्रयान-2 का आर्बिटर अब भी काम कर रहा है।

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