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क्या धारा 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में आई है आतंकी घटनाओं में कमी ? पढ़ें लेटेस्ट अपडेट

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Representative Image [Instagram]
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भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने 5 अगस्त 2019 को राज्यसभा में जम्मू और कश्मीर पर लगे अनुच्छेद 370 जाने की घोषणा की थी। यह तारीख भारत के लिए एक ऐतिहासिक अवसर से कम नहीं थी। अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के मुद्दे पर बाद में कई विवाद खड़े हुए। देश में किसी ने इसे सही ठहराया तो कुछ लोग इसका विरोध भी करते हुए नजर आए। हालांकि यह जानना पूरे देश का अधिकार है कि क्या अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर की स्थिति में आवयश्यक बदलाव आए हैं? खासतौर से आतंक से त्रस्त रहने वाले कश्मीर में अब किस हद तक आतंकी घटनाओं में कमी आई है।

 

भारतीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी की गई ताजा जानकारी के अनुसार आतंकी घटनाओं में साल 2019 के बाद आतंकी घटनाओं में करीब 63.93 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। मंत्रालय ने यह रिपोर्ट साल 2019 से लेकर 15 नवंबर 2020 तक के डाटा को ध्यान में रखते हुए तैयार की है। जिसके मुताबिक 370 हटने के बाद साल 2020 में विशेष बलों के जवानों की संख्या में 29.11 प्रतिशत की कमी आई है।

Photo from Unplash

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रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि आतंकी घटनाओं के चपेट में आने वाले नागरिकों की संख्या में भी 14.28 फीसदी की कमी हुई है। यह जानकारी गृह मंत्रालय ने साल 2020 की वार्षिक उपलब्धियों को गिनाते हुए साझा की है। गृह मंत्रालय का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में 370 हटना और देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कानूनों को कश्मीर और लद्दाख में लागू होना एक बड़ी उपलब्धि है।

 

गृह मंत्रालय ने बताया कि लद्दाख के लिए 44 केंद्रीय कानूनों और 148 राज्य कानून और जम्मू-कश्मीर के लिए 48 केंद्रीय कानूनों और 167 राज्य कानूनों के अनुकूलन का आदेश जारी हुआ था। साथ ही मंत्रालय ने कहा कि गुलाम कश्मीर और छंब से विस्थापित होकर आए करीब 36,384 परिवारों को प्रधानमंत्री विकास पैकेज के अंतर्गत सभी परिवारों को प्रति परिवार 5.5 लाख रुपये की सहायता की गई है। इतना ही नहीं यह सहायता पश्चिमी पाकिस्तान से आए करीब 5,764 परिवारों को भी उपलब्ध कराइ गई है।

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बताते चले कि साल 2019 में नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को हटाना एक ऐतिहासिक कदम माना गया था। अधिकांश लोग इस निर्णय के पक्ष में नजर आए। प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस के विरोध के बावजूद उसके कुछ नेताओं ने भी इस निर्णय का समर्थन किया था। हालांकि उम्मीद है कि अब नए कानूनों के साथ कश्मीर को विकास एक नया सवेरा भी जल्द देखने को मिले।

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