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राज्‍यसभा में इतने सालों बाद नहीं गूंजेंगी जम्‍मू कश्‍मीर के प्रतिनिधि की आवाज, जानें इससे पहले कब हुआ था ऐसा

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Representative Image [Instagram]
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भारतीय संसद का उच्‍च सदन यानि कि राज्‍यसभा में हाल ही में चार सदस्यों का कार्यकाल पूरा हुआ है। ये सभी राज्यसभा सांसद जम्‍मू कश्‍मीर के प्रतिनिधि के रूप में सदन में थे। इनके विदा होते ही राज्‍यसभा में जम्‍मू कश्‍मीर से कोई प्रतिनिधि नहीं है। लेकिन यह पहली बार नहीं जब ऐसा हुआ हो। इससे पहले भी राज्‍यसभा में दो बार ऐसा हो चुका है।

 

करीब 27 साल पहले साल 1994 और 1996 में भी राज्‍यसभा में जम्‍मू कश्‍मीर का कोई प्रतिनिधि नहीं था। इस बार राज्य में केंद्र सरकार द्वारा धारा 370 हटाए जाने और नए संवैधानिक परिवर्तन के चलते यह प्रदेश अब दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में बदल गया है। जिसके बाद अब जम्‍मू कश्‍मीर और नए केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में भी विधानसभा का गठन होना है। तबतक राज्‍यसभा में जम्‍मू कश्‍मीर और लद्दाख के प्रतिनिधि नजर नहीं आ सकेंगे।

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बता दें कि जब तक दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा गठित नहीं होगी तब तक राज्‍यसभा के लिए प्रतिनिधि चुनने का जरुरी आधार उपलब्ध नहीं हो सकता है। इसलिए नई विधानसभा गठित होने तक उच्च सदन में इस क्षेत्र के प्रतिनिधि की आवाज नहीं गूजेंगी। हालांकि एक लीडिंग डेली की रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने कहा है कि दोनों प्रदेशों के विधानसभा क्षेत्रों में हुए परिवर्तन को इस साल मार्च महीने तक पूरा कर लिया जाएगा। पीडीपी के पूर्व राज्‍य सभा सांसद मीर मोहम्‍मद फयाज ने भी लीडिंग डेली से बात करते हुआ कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस साल आखिर तक जम्‍मू कश्‍मीर में चुनाव हो जाएंगे। इसके लिए मोहम्‍मद फयाज पीडीपी की ओर से उपराज्‍यपाल से भी मिलेंगे।

बताते चले कि राज्‍य सभा में हाल ही में जिन चार प्रतिनिधियों का कार्यकाल पूरा हुआ है उनमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद भी शामिल है। उन्हें राज्यसभा में विदाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भावुक हो गए थे। गुलाम नबी आजाद के अलावा पीडीपी पार्टी के दो और भाजपा के एक राज्यसभा सांसद रिटायर हुए हैं। गृहमंत्री अमित शाह ने भी कहा है कि सही समय आने पर जम्‍मू कश्‍मीर चुनाव कराए जाएंगे।

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