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भारत

सर्वोच्च न्यायालय ने की अहम टिप्पणी, कहा- ‘बिना ठोस सबूत के किसी को भी तलब नहीं कर सकती अदालतें’

शीर्ष अदालत ने एक मामले में दिए आदेश में यह बात कही है

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देश के सर्वोच्च न्यायालय ने आज अहम टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति को जो आरोपी नहीं है लेकिन ऐसा लगता है कि उसने अपराध किया है, कोर्ट उसे अपमानित महसूस होने वाला नोटिस भेजकर तलब नहीं कर सकती। कोर्ट सिर्फ उसी व्यक्ति को पेश होने का सामान भेज सकती है जिसके खिलाफ किसी अपराध में शामिल होने के पर्याप्त और ठोस सबूत हों।

 

शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में अदालतें लापरवाह ढंग से अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर सकती हैं। पुख्ता सबूत हों तभी ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अपने अधिकार का इस्तेमाल कर सकती हैं। जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने एक केस की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की है।

Photo from Unplash

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पीठ ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 319 के तहत जब किसी अपराध की जांच या सुनवाई के दौरान अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ सुबूत मिलते हैं तो अदालत उसे समन भेजकर उसकी उपस्थिति को बाध्यकारी बना सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस ताकत का बेजा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जब किसी के खिलाफ किसी भी तरह अपराध से शामिल होने के पर्याप्त और पुख्ता सबूत हों तभी धारा 319 का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने एक मामले में दिए आदेश में यह बात कही है।

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