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भारतीय नौसेना में आज शामिल हो रहा है देश का पहला परमाणु मिसाइल ट्रैकिंग जहाज INS ‘ध्रुव’, दुश्मन की हर हिमाकत पर ऐसे रखेगा नजर

‘INS ध्रुव’ को हिंदुस्तान शिपयार्ड द्वारा DRDO और NTRO के सहयोग से बनाया गया है

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Picture shared by @NAVYESM [Twitter]

भारतीय नौसेना की ताकत में महत्वपूर्ण वृद्धि के रूप में आज भारत का अपना पहला उपग्रह और बैलिस्टिक मिसाइल ट्रैकिंग जहाज ‘ध्रुव’ लॉन्च होने जा रहा है। भारतीय नौसेना के बेड़े में पहले न्यूक्लियर मिसाइल ट्रैकिंग जहाज के शामिल होने के साथ ही समुद्र में भारत की ताकत और बढ़ जाएगी। INS ‘ध्रुव’ भारत की भविष्य की एंटी-बैलिस्टिक क्षमताओं के केंद्र में है और यह जहाज हिंद-प्रशांत क्षेत्र में देश की उपस्थिति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

एक लीडिंग डेली की रिपोर्ट के अनुसार ‘INS ध्रुव’ को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ-साथ भारतीय नौसेना, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (NTRO) के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम से 10,000 टन के इस जहाज को कमीशन किया जाएगा। ‘INS ध्रुव’ को हिंदुस्तान शिपयार्ड द्वारा DRDO और NTRO के सहयोग से बनाया गया था। यह कई विशेषताओं से लैस है जो इसे आधुनिक नौसैनिक युद्ध में एक अत्याधुनिक उपकरण बनाता है।

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INS ‘ध्रुव’ को खासतौर पर चीन और पाकिस्तान की हरकतों पर निगरानी के लिए तैनात किया जा रहा है। क्योंकि इन दोनों देशों के पास न्यूक्लियर मिसाइल दागने की क्षमता हैं। INS ‘ध्रुव’ के समंदर में उतरने के बाद इंडियन नेवी इन दोनों देशों की हिमाकत का और अधिक मजबूती के साथ मुंहतोड़ जवाब देगी। इस जहाज को नौसेना की सामरिक बल कमान द्वारा संचालित किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक पूरी तरह से स्वदेशी इस जहाज की लागत 725 करोड़ रुपये है।

 

INS ‘ध्रुव’ के भारतीय नौसेना के बेड़े में सम्मिलित होने के साथ ही न्यूक्लियर मिसाइल ट्रैकिंग जहाज को अपनी नौसेना में शामिल करने वाला भारत छठा देश होगा। अभी तक ऐसा जहाज फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और चीन के पास ही है। यह जहाज दुश्मनों की सैटेलाइट का पता लगाने में भी सक्षम है। INS ‘ध्रुव’ को लंबी दूरी के राडार, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और ट्रैनिंग एंटीना, से लैस किया गया है। सर्विलांस सिस्टम के ऑपरेशन में इसे 14 मेगावाट बिजली की जरूरत होगी, जो यह खुद बनाने में सक्षम है।

 

दुश्मन की मिसाइलों का पता लगा लेने के बाद INS ‘ध्रुव’ का लैंड बेस्ड बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा सिस्टम उन्हें मार गिराएगा। इस जहाज के पास DRDO द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक सक्रिय स्कैन एरे रडार (AESA) भी है, जो इसे विभिन्न स्पेक्ट्रमों को स्कैन करने और भारत पर नजर रखने वाले जासूसी उपग्रहों की निगरानी करने के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में मिसाइल परीक्षणों की निगरानी करने में सक्षम करेगा। यह दुश्मन की पनडुब्बियों के अनुसंधान और पता लगाने के लिए समुद्र तल को मैप करने की क्षमता से भी लैस है।

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