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भारत

सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन को लेकर की सख्त टिप्पणी, कहा- ‘सड़को पर हमेशा के लिए नहीं किया जा सकता कब्जा’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजमार्गों को हमेशा के लिए इस प्रकार बाधित नहीं किया जा सकता है

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सुप्रीम कोर्ट ने राजधानी दिल्ली में किसान आंदोलन के कारण अवरुद्ध पड़े राजमार्गों को लेकर भारत सरकार से पूछा कि वह किसानों द्वारा की गई सड़क की नाकाबंदी को हटाने के लिए क्या कदम उठा रही है। सर्वोच्च न्यायालय ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राजमार्गों पर हमेशा के लिए कैसे कब्जा किया जा सकता है।

 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी समस्या का समाधान न्यायिक मंच, आंदोलन या फिर संसदीय बहस के माध्यम से किया जा सकता है। लेकिन राजमार्गों को हमेशा के लिए इस प्रकार बाधित नहीं किया जा सकता है और यह एक स्थायी समस्या नहीं हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि हम पहले ही कानून बना चुके हैं और कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून को लागू करना कार्यपालिका का कर्तव्य है।

शीर्ष अदालत द्वारा यह पूछे जाने पर कि सरकार इस मामले में क्या कर रही है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि बेहद ही उच्च स्तर पर एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। हमने आंदोलनकारी किसानों को बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित भी किया है। लेकिन वे बैठक में शामिल नहीं हुए।

 

शीर्ष अदालत ने भारत सरकार को यूपी गेट पर दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर की गई नाकाबंदी खोलने की मांग वाली याचिका पर किसान संघों को पक्ष बनाने के लिए एक औपचारिक आवेदन दायर करने की अनुमति दी है । बता दें कि सुप्रीम कोर्ट नोएडा निवासी मोनिका अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई कर रही था। इस याचिका में कहा गया है कि विरोध प्रदर्शन के कारण लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

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