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भारत सरकार और कार्बी संगठनों के बीच हुआ ऐतिहासिक कार्बी आंगलोंग समझौता, केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा- ‘असम में शांति के लिए प्रतिबद्ध है’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह दिन निश्चित रूप से स्वर्णमयी अक्षरों के साथ लिखा जाएगा

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की उपस्थिति में आज कार्बी आंगलोंग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। अमित शाह ने इस शांति समझौते को एतिहासिक करार देते हुए कहा कि आज ऐतिहासिक कार्बी आंगलोंग समझौते पर हस्ताक्षर हुए। केंद्र की मोदी सरकार दशकों पुराने संकट को हल करने और असम में शांति और क्षेत्रीय अखंडता को सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार असम में शांति और क्षेत्रीय अखंडता को सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाएगी। असम और कार्बी क्षेत्र के इतिहास में यह दिन निश्चित रूप से स्वर्णमयी अक्षरों के साथ लिखा जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि कार्बी आंगलोंग के संबंध में असम सरकार पांच साल में एक क्षेत्र के विकास के लिए 1000 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा इस शांति समझौते को लेकर कहा कि असम में दो आदिवासी समूह बोडो और कार्बी असम से अलग होना चाहते थे। साल 2009 में बोडो समझौता हुआ और इसने असम की क्षेत्रीय अखंडता को बसाते हुए विकास का नया रास्ता खोला। आज कार्बी समझौता हुआ, इससे कार्बी आंगलोंग क्षेत्र में शांति आएगी।

 

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने आगे कहा कि नए समझौते के तहत, पहाड़ी जनजाति के लोग भारतीय संविधान की अनुसूची 6 के तहत आरक्षण के हकदार होंगे। कार्बी लोंगरी एनसी हिल्स लिबरेशन फ्रंट के प्रदीप तेरांग ने कहा कि हमारी मांगे इस समझौते के साथ पूरी हो जाएंगी। हमें उम्मीद है कि यह हमें विकास की ओर ले जाएगा और शांति लाएगा। असम के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी इस समझौते पर नरेंद्र मोदी सरकार को धन्यवाद दिया है।

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