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भारत

हिंसा कभी नहीं रही कश्मीरी संस्कृति का हिस्सा, लोकतंत्र में है सभी मतभेदों को समेटने की क्षमता: राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द

राष्ट्रपति कोविन्द ने कहा कि कश्मीर शांति औेर खुशहाली के एक नए दौर की ओर बढ़ रहा है

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Ram Nath Kovind
Picture shared by @rashtrapatibhvn[Twitter]

देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के दौरे पर हैं। उन्होंने आज शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कनवेंशन सेंटर श्रीनगर में कश्मीर विश्वविद्यालय के 19वे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। राष्ट्रपति कोविन्द ने दीक्षांत समारोह में कहा ‘मेरा दृढ़ विश्वास है कि लोकतंत्र में सभी मतभेदों को समेटने की क्षमता है और नागरिकों की सर्वोत्तम क्षमता को बाहर लाने की ताकत भी है। कश्मीर पहले से ही खुशी से इस विजन को साकार कर रहा है’।

 

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने केंद्र शासित प्रदेश को कश्मीरियत की याद दिलाते हुए कहा कि हिंसा कभी भी कश्मीरियत का हिस्सा नहीं रही है। लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि शांति की परंपरा को तोड़ा गया। मैं मानता हूं कि लोकतंत्र से सभी विषयों का समाधान हो सकता है। लोकतंत्र में भरोसा रखते हुए अपना भविष्य बनाएं और शांति और खुशहाल भविष्य के लिए काम करें।

Ram Nath Kovind

Picture of President Ram Nath Kovind [Twitter]

राष्ट्रपति कोविन्द ने कहा कि कश्मीर जैसे-जैसे शांति औेर खुशहाली के एक नए दौर की ओर बढ़ रहा है। वैसे ही यहां कई नई रोमांचकारी और सुखद संभावनाएं भी दिखने लगी हैं। पूरा देश आप लोगों को प्रशंसा और गर्व की भावना के साथ देख रहा है। कश्मीरी युवा सिविल सर्विस हो या खेल जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में नई ऊंचाईयों की ओर बढ़ रहे हैं।

 

राष्ट्रपति ने कश्मीर के सांस्कृतिक इतिहास की बात करते हुए कहा कि इसका आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव देश पर भी पड़ता है। कश्मीर में ऋग्वेद की प्राचीन पांडूलिपियां लिखी गई थी। कश्मीर कई सांस्कृतियों के मिलन का भी केंद्र रहा है। उन्होंने कश्मीर के यवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि कश्मीर की स्मृद्ध विरासत से सीखें। देश के लिए कश्मीर हमेशा ही आशा की किरण रहा है।

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