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ट्विटर से छिना भारत में मिला सुरक्षा का अधिकार, बोले रविशंकर प्रसाद- ‘ट्विटर ने जानबूझकर नहीं किया आईटी नियमों का पालन’

ट्विटर को भारत में मिला कानूनी सुरक्षा का आधार वापस ले लिया गया है

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Picture shared by ANI [Twitter]

माइक्रोब्लागिंग साइट ट्विटर को भारत सरकार द्वारा लाए गए नए आईटी नियमों का पालन करने में आनाकानी भारी पड़ गया है। ट्विटर को भारत में मिला कानूनी सुरक्षा का आधार वापस ले लिया गया है। जिसका अर्थ यह है कि अगर कोई यूजर ट्विटर पर आपत्तिजनक या भड़काऊ पोस्ट करता है तो ट्विटर के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जा सकेगी।

 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ट्विटर द्वारा 26 मई 2021 से प्रभावी नए आईटी नियमों का अनुपालन अब तक नहीं किया गया है। कंपनी का रवैया देखते हुए उसके खिलाफ यह सख्त कदम उठाया गया है। अब पुलिस ट्विटर पर किसी गैरकानूनी या भड़काऊ पोस्ट के लिए कंपनी के अधिकारियों से पूछताछ कर सकेगी।

 

दूसरी तरफ केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी ट्विटर के मनमाने रवैये को लेकर ट्विटर पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस बात को लेकर कई प्रश्न उठ रहे हैं कि क्या ट्विटर कानूनी संरक्षण का हकदार है। उन्होंने कहा कि ट्विटर 26 मई से प्रभावी हुई नई गाइडलाइंस का पालन करने में असफल रहा है। ट्विटर को नए नियमों का अनुपालन करने के लिए कई अवसर भी मिले, इसके बावजूद उसने जानबूझकर नई गाइडलाइंस लागू ना करने का रास्ता चुना।

 

उन्होंने यह भी कहा कि भारत की संस्कृति में उसकी विशाल भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार बदलाव होते रहते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया का बेहद असर पड़ता है। एक छोटी सी चिंगारी भी बड़ी आग में तब्दील हो सकती है और खासतौर पर फेक न्यूज के मामले में। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि यह बेहद आश्चर्यजनक है कि खुद को स्वतंत्र अभिव्यक्ति के ध्वजवाहक रूप में प्रस्तुत करने वाला ट्विटर खुद जानबूझकर नियमों की अवहेलना करता है।

 

रविशंकर प्रसाद ने ट्विटर की मैनुपलेट नीति पर हमला बोलते हुए कहा कि इस नीति का प्रयोग ट्विटर अपनी सुविधानुसार करता है। जब उसे अच्छा लगा तो वह मैनुपलेटेड टैग लगाता है और जब नापसंद हो तो ऐसा नहीं किया। उन्होंने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में जो हुआ वह फर्जी खबरों से लड़ने में ट्विटर की मनमानी का उदाहरण था। यह ट्विटर की फेक न्यूज के खिलाफ लड़ाई में उसकी विफलता को दर्शाता है। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि भारतीय कंपनियां, चाहे वह फार्मा, आईटी या फिर किसी अन्य क्षेत्र की हों, जब अन्य देशों में कारोबार करने के लिए जाती हैं तो स्वेच्छा से वहां के स्थानीय कानूनों को मानती हैं।

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