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कोरोना

प्रधानमंत्री मोदी ने किया एलान, वैक्सीनेशन की पूरी जिम्मेदारी उठाएगी केंद्र सरकार, 80 करोड़ गरीबों को दिवाली तक मिलेगा मुफ्त अनाज

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में दो बड़ी घोषणा की है

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यानी सोमवार 7 जून की शाम 5 बजे राष्ट्र को संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में दो बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों के वैक्सीनेशन से जुड़ा जो 25 फीसदी काम था। उसकी जिम्मेदारी भी अब भारत सरकार उठाएगी। 21 जून 2021 से देश के हर राज्य में 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों के लिए भारत सरकार राज्यों को मुफ्त वैक्सीन देगी। साथ ही वैक्सीन निर्माताओं से कुल प्रोडक्शन का 75% हिस्सा केंद्र सरकार खुद खरीदकर राज्य सरकार को मुफ्त देगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत दिवाली तक 80 करोड़ लोगों को फ्री अनाज दिया जाएगा।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने संबोधित करते हुए कहा, ‘आज सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अब दिवाली तक आगे बढ़ाया जाएगा। यानि कि नवंबर महीने तक 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को, हर महीने तय मात्रा में मुफ्त अनाज उपलब्ध होगा। उन्होंने आगे कहा कि कोरोना महामारी के इस दौर में भारत सरकार देश के हर गरीब की हर जरूरत के साथ, उसकी साथी बनकर खड़ी है।

वैक्सीनेशन को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसी भी राज्य सरकार को वैक्सीन के लिए कुछ भी खर्च नहीं करना होगा। भारत सरकार सभी देशवासियों को मुफ्त वैक्सीन मुहैया करवाएगी। अब तक देश के करोड़ों लोगों को फ्री वैक्सीन मिली है और अब इसमें 18 वर्ष की आयु के लोग भी जुड़ जाएंगे। उन्होंने आगे कहा, ‘एक अच्छी बात यह रही कि समय रहते राज्य पुनर्विचार की मांग के साथ फिर से आगे आए। इस मांग पर हमने भी सोचा कि देश को लोगों को कोई तकलीफ न हो और सुचारु रूप से उनका वैक्सीनेशन हो। इसके लिए 16 जनवरी से अप्रैल के आखिर तक वाली व्यवस्था को फिर लागू किया जाए। राज्यों के पास टीकाकरण से जुड़ा जो 25 फीसदी काम था। उसकी जिम्मेदारी भी भारत सरकार उठाएगी। यह व्यवस्था दो सप्ताह में लागू की जाएगी।’

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में यह भी बताया कि देश में आने वाले दिनों में वैक्सीन की सप्लाई भी बढ़ने वाली है। उन्होंने दूसरी लहर के दौरान हुई ऑक्सीजन की किल्लत पर कहा कि ‘अप्रैल और मई महीने में देश में मेडिकल ऑक्सीजन की मांग अकल्पनीय रूप से बढ़ गई थी। भारत के इतिहास में कभी भी इतनी मात्रा में मेडिकल ऑक्सीजन की आवश्यकता महसूस नहीं की गई। इस जरूरत को पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया गया। सरकार के सभी तंत्र लगे।

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