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कोरोना वैक्सीनेशन पर दिल्ली हाईकोर्ट के सख्त बोल- ‘अपने लोगों को नहीं मिल पा रही वैक्सीन, लेकिन कर रहे हैं दान’

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Photo from Unplash
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भारत द्वारा कोरोना वैक्सीन को दूसरे देशों में भेजने और अपने ही देश में टीकाकरण की रफ्तार को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। एक लीडिंग डेली की ताजा रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली हाईकोर्ट ने कोरोना वैक्सीन को लेकर कहा कि इसका इस्तेमाल हम पूरी तरह से नहीं कर रहे हैं। इसे या तो अन्य देशों को दान में दिया जा रहा है या बेच रहे हैं और अपने लोगों को वैक्सीन नहीं दे रहे हैं।

 

रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली हाईकोर्ट ने यह बात एक याचिका की सुनवाई करते हुए कही। अदालत ने आगे कहा कि ‘सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ और भारत बायोटेक’ के पास वैक्सीन उपलब्ध कराने की अधिक मात्रा में क्षमता है। लेकिन ऐसा लगता है कि वे इसका लाभ पूरी तरह से नहीं उठा रहे हैं। अदालत ने इन दोनों कंपनियों को अपनी-अपनी वैक्सीन की निर्माण क्षमता का खुलासा करने के निर्देश भी दिए है।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को अदालत परिसरों में मेडिकल केंद्रो की पड़ताल करके कोरोना वैक्सीनेशन सेंटर स्थापित करने की संभावना ढूढ़ने को कहा है। रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि अदालत ने दिल्ली बार काउंसिल की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए हैं। इस याचिका में न्यायाधीशों, कोर्ट परिसर के कर्मचारियों और वकीलों सहित न्याय प्रक्रिया से जुड़े सभी लोगों फ्रंट वर्कर्स में वर्गीकृत करने के लिए कहा गया है।

 

बताते चले कि भारत में दूसरे चरण का कोरोना वैक्सीन प्रोग्राम शुरू हो चुका है। इस चरण में 60 साल और उससे अधिक की उम्र के लोगों और 45 साल की उम्र वालों को भी वैक्सीन दी जाएगी, जिन्हें पहले से कोई बड़ी बीमारी है। साथ ही अब देश भर में चौबीसों घंटे कोरोना वैक्सीनेशन किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी अबतक के आंकड़ों के अनुसार देश में 1.66 करोड़ लोगों का वैक्सीनेशन हो चुका है।

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