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कोरोना

अध्ययन: कोरोना की वैक्सीन लगवा चुके संक्रमितों में अधिक होता है एंटीबाडी का लेवल, इम्यूनिटी में होता है इजाफा

जरनल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के अध्ययनकर्ताओं ने यह शोध किया है

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Photo from Unplash
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दुनिया के कई देशों में कोरोना संक्रमण के मामले एक बार फिर से बढ़ रहे हैं। दूसरी तरफ विश्व भर के वैज्ञानिक इस महामारी को लेकर शोध करते रहते हैं। अब एक नया शोध सामने आया है जिसके मुताबिक कोरोना संक्रमित मरीजों में एंटीबाडी का लेवल अधिक होता है। इससे कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लगने के बाद भी संक्रमित हुए लोगों की सुरक्षा अधिक होती है और उनकी इम्यूनिटी में बेहद इजाफा हुआ है।

 

एक लीडिंग डेली की रिपोर्ट के अनुसार जरनल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के अध्ययनकर्ताओं ने अमेरिका में 1960 हेल्थ-वर्कर्स को फाइजर या मॉडर्ना की कोरोना वैक्सीनों के दोनों डोज दिए थे। इनमें 73 लोग ऐसे भी शामिल हैं जिन्हे टीके की पहली खुराक लगने के बाद कोरोना संक्रमण हुआ था।

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रिपोर्ट के मुताबिक शोधकर्ताओं ने इन लोगों को दो ग्रुप में बांटा था। एक ग्रुप में उन्हें रखा गया जिन्हे वैक्सीन लगने के बाद कोरोना संक्रमण 90 दिनों के अंदर हुआ और दूसरे ग्रुप में उन्हें रखा गया जिन्हे वैक्सीन लगने के तुरंत बाद ही संक्रमण हुआ। दोनों समूह के लोगों में एंटीबाडी का लेवल एक महीने बाद और छह महीने बाद चेक किया गया और उसी आधार पर इस अध्ययन में निष्कर्ष निकाले गए हैं।

 

रिपोर्ट में बताया गया है कि इस वायरस की स्पाइक स्वस्थ कोशिका में घुसने का रास्ता बनाती है। इन्हें खत्म करने के लिए वैक्सीन के जरिये इमोनोग्लोबुलिन जी एंटीबाडी से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा किया जाता है। प्रमुख शोधकर्ता डायना झोंग ने बताया है कि मरीजों में पहले महीने के बाद 14 फीसद एंटीबाडी बनी, तीन महीने बाद 19 फीसद और छह महीने के बाद इनमें 56 फीसद एंटीबाडी बनी।

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