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कोरोना

जायडस कैडिला की कोरोना वैक्सीन ZyCoV-D का वैक्सीनेशन में क्यों शुरू नहीं हुआ इस्तेमाल? सरकार ने बताई यह वजह

जायडस कैडिला की यह कोरोना वैक्सीन दुनिया की पहली डीएनए आधारित वैक्सीन है

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Photo from Unplash
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भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI) द्वारा जायडस कैडिला की स्वदेश में निर्मित कोरोना वैक्सीन ZyCoV-D को 20 अगस्त को आपात इस्तेमाल की मंजूरी दे दी गई थी। लेकिन अभी तक कोरोना टीकाकरण अभियान में यह वैक्सीन शामिल नहीं हो सकी है। अब भारत सरकार ने इस वैक्सीन के इस्तेमाल ना हो पाने के कारण की जानकारी दी है।

 

नीति आयोग के सदस्य डा वीके पाल ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस के दौरान के बताया कि जायडस कैडिला की वैक्सीन ZyCoV-D को पारंपरिक सिरिंज या सुई सुई के माध्यम से नहीं दिया जाएगा। इसे एक ऐप्लिकेटर के माध्यम से प्रशासित किया जाता है, जिसका उपयोग देश में पहली बार किया जाएगा। उन्होने आगे कहा, ‘हम प्रशिक्षकों और उसके लॉजिस्टिक मुद्दों पर काम कर रहे हैं’।

बता दें कि ZyCoV-D वैक्सीन का इस्तेमाल 12-18 वर्ष के किशोरों के टीकाकरण के लिए होना है। जायडस कैडिला की यह कोरोना वैक्सीन दुनिया की पहली डीएनए आधारित वैक्सीन है। ZyCoV-D वैक्सीन को तीन खुराकों में दिया जाएगा। भारत बायोटेक की कोवैक्सीन के बाद यह दूसरी स्वदेशी वैक्सीन है। कंपनी ने दावा किया है कि उसने भारत में अब तक 50 से अधिक केंद्रों पर इस वैक्सीन का क्लिनिकल परीक्षण किया है।

 

एक लीडिंग डेली की रिपोर्ट के अनुसार ZyCoV-D निडल फ्री वैक्सीन होगी। यह वैक्सीन जेट इंजेक्टर से लगेगी। ZyCoV-D वैक्सीन को तीन खुराकों में दिया जाएगा। इसकी पहली डोज के 28 दिन बाद दूसरी डोज और 58 दिनों बाद तीसरा डोज दिया जाएगा। बताते चले कि अब तक टिकाकरण के लिए सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड, भारत बॉयोटेक की कोवैक्सीन, रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-वी, मॉडर्ना की वैक्सीन और जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन को DCGI से इजाजत मिल चुकी है।

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