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अफ्रीका

Corona: दक्षिण अफ्रीका में हुई कोरोना के नए वैरिएंट की पहचान, वायरस के इस स्वरूप से है अधिक एडवान्स

शोधकर्ताओं ने बताया है कि C.1.2 की पारगमन क्षमता भी कहीं अधिक बढ़ी हुई है

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Photo from Unplash
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कोरोना संक्रमण के कारण पूरी दुनिया प्रभावित हुई है। यह वायरस अपने स्वरूप बदलने के लिए भी जाना जाता है। दुनिया भर में अब तक इस वायरस के कई वैरिएंट सामने आ चुके है। अब दक्षिण अफ्रीका में भी कोरोना के संभावित वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट (VOI) की पहचान हुई है। जिसे पैंगो वंश C.1.2 को सौंपा गया है। एक लीडिंग डेली की रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण अफ्रीका के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज (NICD) और क्वाज़ुलु-नेटल रिसर्च इनोवेशन एंड सीक्वेंसिंग प्लेटफॉर्म के शोधकर्ताओं ने बताया है कि C.1.2 को पहली बार इस साल मई महीने में कोरोना की तीसरी लहर के दौरान पहचाना गया था।

 

रिपोर्ट के मुताबिक यह वैरिएंट तब से दक्षिण अफ्रीका के अधिकांश प्रांतों सहित अफ्रीका, यूरोप, एशिया और ओशिनिया जैसे 7 अन्य देशों में पाया गया है। शोधकर्ताओं ने रिसर्च में बताया है कि अभी तक इस वैरिएंट की समीक्षा नहीं की गई है और इसे प्री-प्रिंट सर्वर मेडरेक्सिव पर पोस्ट किया गया है। कोरोना वायरस का यह वैरिएंट C.1 से डेवलप हुआ है। यह दक्षिण अफ्रीका में SARS-CoV-2 की पहली लहर पर हावी होने वाली वंशावली में से एक है।

Representative Image [Instagram]

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शोधकर्ताओं ने बताया है कि C.1.2 की पारगमन क्षमता भी कहीं अधिक बढ़ी हुई है। C.1 की तुलना में नया वैरिएंट बेहद म्यूटेटेड है। यह वैरिएंट वुहान में पाए गए किसी भी मूल वायरस से अधिक म्यूटेटेड है। शोध के मुताबिक C.1.2 एक साल में 41.8 बार म्यूटेट हो चुका है। इसमें पहचाने गए लगभग 52 प्रतिशत स्पाइक म्यूटेशन की पहचान पहले अन्य VOI और VOCs में की गई है।

 

शोध में यह भी पाया गया कि दक्षिण अफ्रीका में हर महीने में C.1.2 जीनोम की संख्या में लगातार बढ़त दर्ज हुई है। शोधकर्ताओं ने बताया है कि यह दक्षिण अफ्रीका में बीटा और डेल्टा वैरिएंट में शुरुआती पहचान के दौरान देखी गई वृद्धि के समान है। यह वैरिएंट डेल्टा से भी अधिक एडवान्स्ड है और इसे समझने के लिए अधिक अध्ययन की आवश्यकता है।

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