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कोरोना

अध्ययन: भारत की ‘वॉर्म वैक्सीन’ है कोरोना के सभी वैरिएंट्स के खिलाफ है असरदार, जानिए क्या कहता है शोध

एक अध्ययन के अनुसार फॉर्मूलेशन कोरोना के सभी चिंताजनक मौजूदा SARS-CoV-2 रूपों के खिलाफ प्रभावी साबित हुआ है

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Photo from Unplash
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कोरोना महामारी से निपटने के लिए सरकारों और वैज्ञानिकों के सामने कई चुनौतियां हैं। कोरोना वायरस के बदलते स्वरूप इस चुनौती को और अधिक बढ़ा देते है। वायरस की रोकथाम के लिए भारत ने एक और ऐसी ‘वॉर्म वैक्सीन’ विकसित करने में सफलता हासिल की है। जो कोरोना के सभी प्रमुख वैरिएंट्स के खिलाफ प्रभावी बताई गई है। बायोटेक फर्म Mynvax और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के वैज्ञानिकों द्वारा इसका फॉर्मूलेशन तैयार किया गया है।

 

IISc द्वारा गर्म-सहनशील कोरोना वैक्सीन फॉर्मूलेशन जानवरों में हुए एक अध्ययन के अनुसार कोरोना के सभी चिंताजनक मौजूदा SARS-CoV-2 रूपों के खिलाफ प्रभावी साबित हुआ है। ACS इंफेक्शियस डिजीज जर्नल में गुरुवार को प्रकाशित इस शोध से पता चला है कि वैक्सीन फॉर्मूलेशन ने चूहों में एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया शुरू की।

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शोधकर्ताओं ने कहा कि फॉर्मूलेशन ने हैम्स्टर्स को वायरस से भी बचाया और एक महीने तक 37 डिग्री सेल्सियस और 90 मिनट तक 100 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर रहा। ऑस्ट्रेलिया के कॉमनवेल्थ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (CSIRO) के शोधकर्ताओं सहित टीम ने नोट किया कि अधिकांश टीकों को प्रभावी रहने के लिए रेफ्रिजरेशन की आवश्यकता होती है।

CSIRO ऑस्ट्रेलिया के अनुसार यह ‘वॉर्म वैक्सीन’ शरीर में प्रवेश करने के बाद एंटबॉडी विकसित करती है। यह एंटीबॉडी शरीर में अटैक करने वाले हर कोरोना के वैरिएंट के प्रभाव को कम कर सकता है। इस प्रकाशित अध्ययन का नेतृत्व IISc के प्रोफेसर राघवन वरदराजन ने किया था । बता दें कि अब तक वैक्सीन को कहीं भी पहुंचाने के लिए कोल्ड चेन जरूरत पड़ती है। लेकिन यह ‘वॉर्म वैक्सीन’ फॉर्मूलेशन 37 डिग्री सेंटीग्रेड पर एक महीने तक स्थायी रह सकता है और 100 डिग्री सेंटीग्रेड पर 90 मिनट तक रह सकता है। इसलिए वैज्ञानिकों की यह खोज वैक्सीनेशन की दिशा में प्रगति का एक बड़ा कदम साबित होगा।

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