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कोरोना

इस वजह से हवा में 10 मीटर तक फैल सकता है कोरोना संक्रमण, बचाव के लिए सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन

भारत सरकार ने कोरोना के हवा से फैलने के कारणों के बारे में बताते हुए इनसे बचाव के लिए नई गाइडलाइन जारी की है

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Photo from Unplash
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कोरोना महामारी के कहर ने पूरे विश्व को हर तरह से प्रभावित किया है। यह वायरस जितनी तेजी से अपना स्वरूप बदलता है। उतनी ही तेजी से इसके संक्रमण के प्रसार की संभावनाएं भी बढ़ती है। अब कोरोना संक्रमण हवा के जरिए भी अधिक प्रसारित हो सकता है। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय ने कोरोना के हवा से फैलने के कारणों के बारे में बताते हुए इनसे बचाव के लिए नई गाइडलाइन भी जारी की है।

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के अनुसार कोरोना संक्रमण के प्रसार के प्रमुख कारण एयरोसोल और ड्रॉपलेट्स हैं। किसी संक्रमित व्यक्ति के ड्रॉपलेट्स दो मीटर हवा में फैल सकते है। लेकिन एयरोसोल उन ड्रॉपलेट्स को 10 मीटर तक आगे तक फैला सकता है। यानि कि अब संक्रमण से बचाव के लिए 10 मीटर की दूरी भी पर्याप्त नहीं है।

सलाहकार कार्यालय के मुताबिक जिस संक्रमित व्यक्ति में कोरोना के कोई लक्षण नहीं दिख रहे हैं, वह भी ‘वायरल लोड’ बनाने लायक पर्याप्त ड्रॉपलेट्स छोड़ सकता है। यह अन्य लोगों को संक्रमित कर सकता है। संक्रमित व्यक्ति द्वारा खांसने, छींकने बोलने, गाने, हंसने, सांस छोड़ने से और नाक से निकलने वाले स्राव से वायरस निकलता है। इसलिए सुरक्षित शारीरिक दूरी के साथ-साथ हाथ धोने और मास्क पहनने जैसे कोरोना से जुड़े नियमों का नियमित पालन करे।

नई गाइडलाइन के अनुसार ड्रॉपलेट्स और एयरोसोल गैर-हवादार और इनडोर जगहों में संक्रमण के प्रसार के जोखिम को काफी बढ़ा देते हैं। हालांकि वेंटिलेशन वाली जगहों पर और आउटडोर में इसके प्रसार का खतरा कम रहता है। गाइडलाइन में कहा गया है कि जिन सतहों के संपर्क में लोग अधिक रहते हैं उनकी नियमित सफाई करें। इसके अलावा प्लास्टिक, स्टेनलेस स्टील और ग्लास पर वायरस लंबे समय तक रहता है। इसलिए इन चीजों की भी नियमित रूप से सफाई अनिवार्य है।

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