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जीका वायरस ने दी कानपुर में दस्तक, अब तक चार मामले आए सामने; जानिए कितना खतरनाक है यह संक्रमण

कानपुर के एयरफोर्स हॉस्पिटल और हैलट में जीका संक्रमितों के उपचार की व्यवस्था की गई है

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Photo from Unplash
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केरल के बाद अब जीका वायरस के मामले उत्‍तर प्रदेश में भी सामने आ रहे हैं। कानपुर जिले में आज जीका से संक्रमित तीन मरीज मिले हैं। राज्य में जीका के मामले बढ़ने से उत्‍तर प्रदेश सरकार अलर्ट हो गई है। एक लीडिंग डेली की रिपोर्ट के अनुसार कानपुर के एयरफोर्स स्टेशन क्षेत्र के तीन और कर्मचारी जीका से संक्रमित पाए गए हैं। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) लखनऊ के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की लैब ने जांच में जीका की पुष्टि की है।

 

रिपोर्ट में बताया गया है कि इससे पहले मिला जीका संक्रमित मरीज चकेरी के पोखरपुर का निवासी है। शहर में जीका के मामलो की संख्या चार हो गई है। मामलो में बढ़त को देखते हुए डीएम ने एयरफोर्स स्टेशन के अंदर और उनसके आसपास के क्षेत्रों में एडीज मच्छरों की ब्रीडिंग रोकने के लिए सघन अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही एयरफोर्स हॉस्पिटल और हैलट में जीका संक्रमितों के उपचार की व्यवस्था भी की गई है।

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जीका वायरस की बात करे तो यह मुख्य रूप से एक संक्रमित मच्छर- एडीज इजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस के काटने से फैलता है। इस वायरस के संक्रमण का प्रभाव लक्षणों के साथ एक हफ्ते तक चलता है। रिपोर्ट के मुताबिक यह बीमारी हल्की होती है। कई लोगों में इसके लक्षण नहीं दिखते हैं या सिर्फ हल्के लक्षण दिखते हैं। लेकिन प्रेग्‍नेंसी की स्थिति में यह वायरस घातक साबित होता है। यह इंफेक्‍शन प्रेग्‍नेंसी के दौरान गंभीर बर्थ डिफेक्‍ट पैदा कर सकता है।

 

रिपोर्ट में बताया गया है कि जीका वायरस एक प्रेग्‍नेंट महिला से प्रेग्‍नेंसी के दौरान या जन्म के समय भ्रूण को तक पहुंच सकता है। जिससे इंफेक्‍शन होने पर गंभीर बर्थ इंफेक्‍शन पैदा हो सकता है। मौजूदा अध्‍ययनों के मुताबिक गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) जीका वायरस से जुड़ा है। हालांकि एक बार जीका से संक्रमित होके बाद उस व्‍यक्ति को भविष्य में फिर यह इंफेक्‍शन नहीं होने की संभावना भी होती है।

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