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भारत

शिक्षक पर्व पर पीएम मोदी ने की शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत, कहा- ‘केवल समावेशी ही नहीं बल्कि न्यायसंगत भी होनी चाहिए शिक्षा’

प्रधानमंत्री मोदी ने ऑनलाइन पढ़ाई को और सहज बनाने की अपील की है

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भारत सरकार शिक्षकों के सम्मान में 5 सितंबर से लेकर 17 सितंबर तक शिक्षक पर्व मना रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शिक्षक पर्व के उद्घाटन सम्मेलन को संबोधित किया और साथ ही शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की है। प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देशभर के शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ-साथ अभिभावकों से भी संवाद किया है।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि हम लोग भविष्य के भारत को नया आकार देने के लिए जुटे हुए हैं। नया भारत आज नया संकल्प ले रहा है। उन्होंने आगे कि कहा कि शिक्षा न केवल समावेशी होनी चाहिए बल्कि न्यायसंगत भी होनी चाहिए। टॉकिंग बुक्स और ऑडियोबुक अब शिक्षा प्रणाली का हिस्सा हैं। भारतीय सांकेतिक भाषा के लिए एक शब्दकोश बनाया गया है। देश में पहली बार भारतीय सांकेतिक भाषा को पाठ्यक्रम में एक विषय के रूप में शामिल किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने संवाद के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई को और सहज बनाने की अपील करते हुए कहा कि कोरोना में शिक्षकों ने कई चुनौतियों का समाधान किया है। लेकिन शिक्षकों के पास अपनी क्षमताएं को आगे बढ़ाने का अवसर है। समाज में शिक्षकों का योगदान बहुमूल्य और अतुलनीय है। उन्होंने आगे कहा कि आज शिक्षक पर्व के अवसर पर कई नई योजनाओं का शुभारंभ हुआ है। ये इसलिए भी अहम है, क्योंकि देश अभी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है।

 

पीएम मोदी ने बताया कि ‘मैंने सभी ओलंपियन और पैरालिंपियनों को आजादी का अमृत महोत्सव मनाने के लिए 75 स्कूलों का दौरा करने के लिए कहा है। मैं आप सभी से उनके संपर्क में रहने का आग्रह करता हूं। वे स्कूलों के छात्रों से मिलेंगे। ये खिलाड़ी भविष्य में स्टूडेंट्स को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं’। बता दें कि केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से शिक्षा पर्व का आयोजन किया गया है।

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